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रात हथेलियों में समेट रखी है

रात हथेलियों में समेट रखी है.... मुस्कुराओ तो दिन वाले जुगनू आज़ाद कर दूँ! सुनो! किसी रोज़ मेरे लिए वक़्त हो जाओ ना😊 शुभरात💐💐💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें