ककल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 2383

भाषा / Language

हम सिर्फ वही कहानियां पूरी पढ़ पाते हैं जिनमें हम होना चाहते…

✦
हम सिर्फ वही कहानियां पूरी पढ़ पाते हैं जिनमें हम होना चाहते हैं। खुद को मनपसंद किरदार में निभते देखने से बेहतर कोई सुकून नहीं। *आज शाम का रूमानी नज़ारा और एक बेहद खूबसूरत घर के पास पहाड़ी रेस्तरां में गुज़री संगीतमय शाम ।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें