कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 2383

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हम सिर्फ वही कहानियां पूरी पढ़ पाते हैं जिनमें हम होना चाहते…

हम सिर्फ वही कहानियां पूरी पढ़ पाते हैं जिनमें हम होना चाहते हैं। खुद को मनपसंद किरदार में निभते देखने से बेहतर कोई सुकून नहीं। *आज शाम का रूमानी नज़ारा और एक बेहद खूबसूरत घर के पास पहाड़ी रेस्तरां में गुज़री संगीतमय शाम ।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें