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पहाड़न... ये पहाड़ को अपने पीठ पर धर कर चलती हैं।

पहाड़न... ये पहाड़ को अपने पीठ पर धर कर चलती हैं। पहाड़ इनका प्रेमी है और नदी इनकी सखी। इनकी मुस्कान और सादगी से पहाड़ जिंदा दिलकश रहता है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें