कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 2355

भाषा / Language

दक्षु कहता है आप हर चीज़ में कुछ और चीज़ देखती रहती हो।

दक्षु कहता है आप हर चीज़ में कुछ और चीज़ देखती रहती हो। कितनी फ़ोटो खींचती हो। मैं उसे क्या कहूँ...कि मन कितना कुछ कहता जाता है। इन तस्वीरों में कविता छिपी है। कल्पना डूबी है। पढ़ने की कोशिश करती हूँ। जो बोलते नहीं उनको सुनने की छटपटाहट कौन समझे मेरी। हँसती रहती हूँ...उसकी बातों पर। चलते चलते जिस पर मन आया कैद कर लिया।ये खुद को खुश रखने की सबसे बेहतरीन ट्रिक है। सुंदरता तलाशना.... किसी के मौन को छू कर उसे गुदगुदा देना। मुझे पसंद है...तलाशना साँझा कर रही ...
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें