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विनोद के साथ घूमने का कोई प्लान नहीं बनाना होता। बस तैयार ह…

विनोद के साथ घूमने का कोई प्लान नहीं बनाना होता। बस तैयार होकर खड़े हो जाओ।सड़क पर जहां जाने के लिए गाड़ी मिले या जहां का मन बन जाये उस वक़्त वहीं को चले जाते हैं। पहाड़ में घूमने के लिए ज्यादा ताम झाम नहीं चाहिए होता ।बस एक झोला ,जूते, कुछ रुपये होना ही अनिवार्य लगता है मुझे।यहां सब इतना सादा है कि आपकी अतिरिक्त चमक धमक नाज़ नखरे खुद धुल कर इकसार हो जाते हैं। आज जागेश्वर धाम को चल पड़े हम तीनों। यहां कोरोना का प्रकोप काफी कम है। मंदिर में भी पास सिस्टम था। बहुत कम श्रद्धालु थे तो दर्शन खूब सुंदर हुए। आस्था और शांत मन का संगम । शिव ही सुंदर है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें