कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 2342

भाषा / Language

प्रेम प्रेमी पर कभी निर्भर नहीं रहा

प्रेम प्रेमी पर कभी निर्भर नहीं रहा.... हाँ प्रेमी हमेशा प्रेम पर अमरबेल जैसा पड़ा रहा
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें