कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 2308

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तुम्हारे बाद ये ज़िन्दगी है जिससे इश्क़ लंबा चला है।

तुम्हारे बाद ये ज़िन्दगी है जिससे इश्क़ लंबा चला है। तुम मानते नहीं हो .... वो रूठती ज्यादा है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें