भाषा / Language
एक रोज़ चाँद पर पारिजात के फूल से तुम्हारा नाम लिखूँगी
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एक रोज़ चाँद पर पारिजात के फूल से तुम्हारा नाम लिखूँगी...
किसी रोज़ चंपा के फूल की माला तुम्हारे शहर से आती हुई हवा को पहनाऊँगी...
एक रोज़ उगाऊंगी फूल.. अपने नाम का पहला अक्षर तुम्हारे होंठों पर...
तुमको सबसे प्यारा फूल कहकर खुद में खोंस लूँगी ... सदा के लिए
ऐसी कई बातें मैं फूलों से कहकर खुद में उजास कायम रखती हूँ।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें