भाषा / Language
बात पैमाने की
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बात पैमाने की....
*धरती बादल से बड़े यार कौन होंगे...
एक पिलाता जाता है ...
दूजी पीती जाती है।
इस झूम को लिखना बेकार है।
*पैमाना छोटा या बड़ा नहीं होता ....
उसमें भरी जा सकने वाली उदासी तय करती है कि कम खर्च हुए या लुट गए।
*एक बूंद से भी बुझ जाती है मेरी प्यास....
बस नीयत की बात है।
*पीकर खत्म हो जाती तो उदासी क्या बुरी थी...
फ़िज़ूल हमने पैमाने में डाली उसकी हँसी
*बेहतरीन पैमाना है कागज़....
प्रेम जैसी नायाब मय को बेख़ौफ़ सजा कर रखता है।
*प्रेम के मद के लिए कोई पैमाना तय नहीं है...
आँखें, मन, होंठ,हथेली ,सिरहाना ,पीठ सब इततु इततु वाले काँच के गिलास हैं।
*यारियां निभाने के लिए गिलास में क्या उतरना....
दिल में उतर कर देखो ना..
*ताउम्र का नशा कर लिया... एक रोज़
बाद उसके आँखें ख़ाली
मन भी ख़ाली रहा।
ये पैमाना क्या होता है?
*अपने अपने शहर से पी जा सकती है ये उदासी ....बस महफ़िल प्रेम की हो।
*तुम्हारे साथ को अगर बोतल में भरा जा सकता तो ये सबसे बेहतरीन पुरानी शराब होती।
*हम एक दूसरे की शिफ़ा हैं...
लोग लत समझें ...तो मैं क्या करूँ?
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें