कल्पनाशब्दों के बीच
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प्रतीक्षा

प्रतीक्षा...... मेरे लिए मनपसंद दिशा है। एक पास आता हुआ सम्मोहन फ़र्श पर पड़ा हुआ मोरपंख। *छुट्टियाँ हैं आज से....ख़ाली बैठी थी शाम भर... गीत सुने कुछ लिखा... एक नाम लिया कुछ रंगों में डूबी याद किया😊😊😊 कुछ न कुछ करते रहना चाहिए ।साँस लेने के अलावा।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें