तन से ढंके हुए मन को नहीं मन से ढंके हुए तन को प्रेम पहनता है।
रचना 227821 अक्टूबर 2020भाषा / Languageहिन्दीEnglishतन से ढंके हुए मन को नहीं मन से ढंके हुए तन को प्रेम पहनता है।✦तन से ढंके हुए मन को नहीं मन से ढंके हुए तन को प्रेम पहनता है।कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें