ककल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 2278

भाषा / Language

तन से ढंके हुए मन को नहीं मन से ढंके हुए तन को प्रेम पहनता है।

✦
तन से ढंके हुए मन को नहीं मन से ढंके हुए तन को प्रेम पहनता है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें