कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 2256

भाषा / Language

तुम्हारे नाम के वो मंज़र याद रहते हैं

तुम्हारे नाम के वो मंज़र याद रहते हैं जो लफ्ज़ इश्क में खर्चे आबाद रहते हैं शुभरात💐💐💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें