कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 2236

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मैं सुन रही हूँ.... हमेशा की तरह

मैं सुन रही हूँ.... हमेशा की तरह ... हाँ.... ये जरुरी कत्तई नहीं कि ....तुम बोल भी रहे हो मुझसे ... ओ मेरे मन!
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें