कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 2208

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अपनी पुरानी तस्वीरों में हम कितने नए दिखते हैं। आज फुरसत मे…

अपनी पुरानी तस्वीरों में हम कितने नए दिखते हैं। आज फुरसत में थी तो पुरानी एल्बम निकाल ली। यादों का जखीरा... पापा से छिप कर जीन्स का शौक पूरा करना। पहली बार साड़ी पहनना। दुल्हन भी खुद ही तैयार हो गयी। बस इतना श्रृंगार काफ़ी था ज़िन्दगी भर के लिए 😊😊😊 मुस्कान भी आ रही खुद को देख कर और देखो शाम भी गुज़र गयी तस्वीरों में पुरानी तस्वीरों में नई कल्पना *तस्वीर से तस्वीर लेने की कोशिश की है ।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें