कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 2198

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शिकायतें तो बहुत हैं तुमसे

शिकायतें तो बहुत हैं तुमसे ..... पहले ये बताओ .... कल क्यों नहीं आये ? चाँद...... मैं तुमसे कह रही हूँ क्या इधर उधर देख रहे हो ? और please ... अब ये टकटकी लगाकर मुझे देखना बंद करो और मुस्कुराना ? मुस्कुराना तो जरा भी मत ...... 😊😊😊😊😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें