भाषा / Language
रात.....चाँद संग खेल रचाया
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रात.....चाँद संग खेल रचाया
लफ़्ज़ों का ....वो पेंच लड़ाया
ओह !
उलझा चाँद ..... देखो कटता चाँद
बहता चाँद ...... देखो उतरा चाँद
नैनों ने फिर लपका चाँद .....
न डोर रही
न छोर रहा
बस लफ़्ज़ों से .....लिपटा चाँद
इश्क इश्क बस ....कहता चाँद
कल्पना 💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें