कल्पनाशब्दों के बीच
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उससे मैं अक्सर हारना पसंद करती हूँ जिसे जीतने की ज़िद्द ठान…

उससे मैं अक्सर हारना पसंद करती हूँ जिसे जीतने की ज़िद्द ठान लेती हूँ। खुदा तो यूं भी मिल जाया करता है। *तस्वीर पिछले साल मेलबोर्न के एक क्लब की है जहां संग और संगीत दोनों शानदार था।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें