कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 2148

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मुझे आहत करने का अधिकार सिर्फ़ दो लोगों के पास है

*मुझे आहत करने का अधिकार सिर्फ़ दो लोगों के पास है .... और दोनों ने ही आज मुझे निराश नहीं किया। *जिस रोज़ भी वो नहीं बोलता ... सब वैसा ही रहता है... बस अंधेरा जल्दी हो जाता है *वो मेरी पुकार लौटाता नहीं... सुनो चिड़िया क्या कल तुम उसे मेरे लिए पुकार दोगी? *सोचना उसे और सोचते ही चले जाना...... मेरी सबसे खूबसूरत अनलिखी कविता है *बिछड़ते वक़्त मुझे तनहाइयाँ सौंपते हुए उसने कहा.... अपना ख़्याल रखना... तैनूं पता नहीं शायद.... इश्क़ विच इंज नहीं चलदा *इक ही रंजो गम काफ़ी है ... मुस्कुराने के लिए तुम *तुम्हारा मुझमें खिलने महकने लरजने मुरझाने गिर जाने का कोई तय समय नहीं है... *थकान के भीतर आज एक थकान है .. सोच रही कुछ दिन के लिए इस प्रेम को उतार कर फेंक दूँ। शुभरात💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें