भाषा / Language
पिछले पांच घंटे से ये मुआ फोन मुझसे चिपका हुआ था।इसे देख दे…
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पिछले पांच घंटे से ये मुआ फोन मुझसे चिपका हुआ था।इसे देख देख कर पक गयी। मीटिंग... क्लास... मीटिंग 😢😢😢 आँखें दुखरी
अब जिसको देख रही हूँ ....आँखों को ही नहीं मन को भी लुभा रहा।
आप भी देखो...
देखो मत ...
तृप्त हो जाओ😊😊😊
* विनोद कह रहे दिन में सादे दाल चावल खिलाने की भरपाई कर रही हो क्या?
अब क्या बताऊँ....पकाने की आदत है ।
कभी शब्दों से कभी पकवानों से
दो बार फ़ोटो इस लिए भेजी कि कहीं कम न पड़ जाएं।इतनी ही शिद्दत बची थी पकाने की☺️☺️☺️
#cookwhenuneedaphonebreak
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें