भाषा / Language
सब कुछ कह गए
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*सब कुछ कह गए......
बस दो पूरे इक आधा अक्षर रह गया
*भीग जाने के लिए मेरे पास पहाड़ बहुत थे .....
फिर तुम्हारी रेतीली आंखों से मिलना हुआ...
*अरे! इतना तो आसान था तुम्हें खुद से जाने देना.....
कुछ कागजों को सलवट ही तो देनी थी
एक पते को खारिज़ ही तो करना था
*मेरे हिस्से का वक़्त कहाँ रखते हो ?
देखो तो सही ......
इक समुन्दर उग आया होगा वहां
*इसे बस इक इत्तेफ़ाक़ ही समझियेगा.... कि आप चले आये
वर्ना.....
यहाँ कवायद तो मेरी ख्वाइशों की हो रही थी
शुभरात💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें