भाषा / Language
मैं तुमसे बोलता नहीं
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मैं तुमसे बोलता नहीं
मिलता नहीं
दिखता नहीं
सुनता नहीं
हूँ भी कहीं या नहीं ...ये भी पता नहीं
क्यूँ आती हो रोज़?
क्यूँ पुकारती हो?
मैं कौन हूँ ?
ईश्वर के बाद वाला ईश्वर ...
मैंने उससे कहा
*खुद से तो रोज़ ही कहती हूँ।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें