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दस बार ठोकर मार कर उठाया है अपना मन पसंद सिक्का

दस बार ठोकर मार कर उठाया है अपना मन पसंद सिक्का ... हासिल मेरा है तू हौसला भी...
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें