कल्पनाशब्दों के बीच
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प्रेम करने से अच्छा है प्रेम लिख कर तर जाओ।

*प्रेम करने से अच्छा है प्रेम लिख कर तर जाओ। *एक फूल ही हैं जो अपनी उदासी भी झमक कर दिखाते हैं... आज मैं बस फूल हूँ। *इत्तेफ़ाक ही समझो.... हम यूँ ही होते नहीं किसी के *यूँ प्रेम छिटकाओगे तो उदासी ही बनेगी.... कैनवास पर *फ़िक्र सा कुछ रोज़ रखती हूँ तेरे दर पर.... किसी रोज़ उठाकर देख ... प्रेम *तुम मेरी ज़िन्दगी का वो बेहतरीन हिस्सा हो जो मिला .... बिछड़ा.... रुका ...... चला ... पर ....आज तलक थका नहीं *आज दिन इनको संवारने में बीत गया। happy happy लग रहे अब। जीवन हरा रहे हमेशा। बीच बीच में जब मन हुआ ..... कहा भी....😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें