भाषा / Language
लगभग तीन बरस से तुम्हारा इंतज़ार था
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लगभग तीन बरस से तुम्हारा इंतज़ार था....
तुमसे जाने क्यों मुझे आसक्ति है। ऐसा लगता है तुम से खूबसूरत कुछ नहीं ....
तुम इस लिए खूबसूरत लगते हो कि झुके - झुके मुस्कुराते महकते हो।
इस फूल का इंतज़ार बड़ी शिद्दत से कर रही थी।नर्सरी से छोटा सा लायी थी तुम्हें ।आज इतने बरस बाद पहला फूल मुबारक मुझे... सुबह का तोहफ़ा
अब जब जब तुम चटकोगी मैं महक रही होंगी।
"मधुमालती " ...
मुझे तुम जैसे रहना है....
संग -संग पास - पास
*लिख कर हम बस अपनी धूल झाड़ लेते हैं ..... जैसे भीग कर कोई पौंधा नया हो गया हो....
लिखना सबसे आसान सुंदरता है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें