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रचना 2061

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जितनी दूर तुम हो उतनी ही दूर मेरा चाँद

जितनी दूर तुम हो उतनी ही दूर मेरा चाँद.... कौन मेरा ? मेरा क्या तू लागे ? क्यूँ तू बाँधे .... मन से मन के धागे बस चले न क्यूँ मेरा ...तेरे आगे शुभ रात💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें