भाषा / Language
जितनी दूर तुम हो उतनी ही दूर मेरा चाँद
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जितनी दूर तुम हो उतनी ही दूर मेरा चाँद....
कौन मेरा ?
मेरा क्या तू लागे ?
क्यूँ तू बाँधे ....
मन से मन के धागे
बस चले न क्यूँ मेरा ...तेरे आगे
शुभ रात💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें