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रचना 2054

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लड़कियाँ संवार देती हैं

लड़कियाँ संवार देती हैं... लड़के खुद संवर जाते हैं.. प्रेम पता ही नहीं क्या खिचड़ी पकाता रहता है इनमें?
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें