मुझसे इश्क़ की हिमाकत ना कीजिये मैं कल्पना हूँ..... तुम्हें छिपा नहीं पाऊँगी ज़ाहिर भी कर दूंगी तुमको और दिखा भी नहीं पाऊँगी शुभरात