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रचना 2004

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प्रेम में पड़कर मैंने अपने हाथों से अपना खूबसूरत दुःख बुना है

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प्रेम में पड़कर मैंने अपने हाथों से अपना खूबसूरत दुःख बुना है... बेहद महीन
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें