कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 1993

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अमूमन कविता के हाथ बस शब्द लगते हैं

अमूमन कविता के हाथ बस शब्द लगते हैं... कल्पना कलम की नोंक में चिपकी रह जाती है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें