अमूमन कविता के हाथ बस शब्द लगते हैं... कल्पना कलम की नोंक में चिपकी रह जाती है।
रचना 19934 जुलाई 2020भाषा / Languageहिन्दीEnglishअमूमन कविता के हाथ बस शब्द लगते हैं✦अमूमन कविता के हाथ बस शब्द लगते हैं... कल्पना कलम की नोंक में चिपकी रह जाती है।कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें