कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 1976

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बेख़ौफ़ हँसा कर

बेख़ौफ़ हँसा कर.... दुःख के दाँत वैसे ही गिर जाएंगे। *माँ
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें