ककल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 1972

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बस उड़ा ले जाने की बात थी

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बस उड़ा ले जाने की बात थी ..... भूरे पत्ते उड़ गए हरे रह गए। दुःख लुकाना था ...लुका दिया।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें