कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 1971

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फेसबुक से तकरीबन 7 साल पहले से जुड़ी हूँ।जो भी ....जैसा भी ल…

फेसबुक से तकरीबन 7 साल पहले से जुड़ी हूँ।जो भी ....जैसा भी लिखा... यहीं लिखा। fb मेरे लिए medium of expression है। सात साल में कई व्यक्तित्व जुड़े। कुछ day1 से हैं और आज तक मेरे साथ हैं। करीब 3200 व्यक्तित्व मेरे साथ जुडें हैं इस वक़्त। उसमें से करीब 200 ही ऐसे होंगे जिनसे मिलना मिलाना होता है। बाक़ी बस हैं....। जैसे मैं उनके लिए हूँ... बस हूँ। मेरी वाल पर रायता फैलाने का और झाड़ू लगाने के सारे अधिकार सिर्फ मेरे पास हैं। मुझे वाल सुथरी सुथरी ही पसंद है। कहने की लत है तो लिखती हूँ। तस्वीरें पसंद आती हैं तो पोस्ट कर देती हूँ। ज्यादा चाशनी में लिपटे कमैंट्स पकड़ लेती हूँ। 46 साल की बूढ़ी आंखें अब भी बहुत तेज़ हैं। खुश्बू आ जाती है कि कौन सच ,कौन झूठ और कौन just fake कर रहा। क्योंकि मेरी वाल पर hawk eye फिट है तो किसी किसी के कमैंट्स डिलीट हो जाते हैं। बुरा न लगे तो ठीक।लगे तो और भी ठीक। आगे भी ऐसा ही होगा। अमूमन सब लाइन में आ ही जाते हैं इधर वर्ना 3200 -1 ......ब्लॉक तस्वीर देख कर लेखनी पर कमेंट करने वाले ज्यादा लशकारे मारते हैं। और लेखनी पर फ़िदा होने वाले अलग से साथ खड़े । तो ज्यादा परेशान कम से कम मेरे लिए तो न ही हुआ करें। आप पढ़ लेते हैं...समय देते हैं... नतमस्तक हूँ। नए जुड़े मित्र कुछ patience रखें ।messenger पर फूल ,चाय, ईश्वर ,ज्ञान लिए हुए सब खड़े है आपसे कई साल पहले के जुड़े हुए। सबको ये लाइन पता है ..avoid chatting or else get blocked. आप भी जान लें।मैसेंजर की खिड़की मेरी अपनी है।मनचाहे पर खुलती है वो भी अगर मन हुआ तो।वर्ना unistalled रहता है। सबकी वाल पर फेरा नहीं दे पाती। शायद देना ही नहीं चाहती। कुछ गिन कर 15 लोग होंगे जिन तक पहुंच रहीं हूँ सालों से। या फिर वो जिनकी लेखनी लुभाती है मुझे। बाकी सब से माफ़ी । बिना मिले विश्वास नहीं करती मेरी आँखें। तो अगाध मित्रों से खुद मिल लेती हूँ । जब तक मन नहीं इशारा करता नींव नहीं रखती। उतना ही उठाती हूँ जितना सह सकती हूँ। सरल हूँ ... सच्ची हूँ ऐसे ही रहूँगी। आप सब भी मस्त रहें । इधर वाली कल्पना मदमस्त है। chilled टाइप्स। Enjoy😊😊😊😊😊😊💐💐💐💐💐💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें