कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 1969

भाषा / Language

नारी____

नारी____ ईश्वर ने मुझे बड़ी फुर्सत में बनाया कई बार सोचा फिर मुझमें कुछ जादुई लगाया ऐसी मिटटी से बनाया जिसमें कमाल की लोच थी ऐसी ममता दी जिसमें बस एक सामान सोच थी ऐसा स्पर्श दिया कि सारा दर्द घट जाए ऐसा वजूद दिया कि ....पानी कभी बर्फ ,कभी भांप सा बंट जाए ऐसी कोमलता दी कि अहम् छू ते ही पिघल जाए ऐसी सहनशीलता दी कि मुसीबत मिलते ही गल जाए ऐसा नजरिया दिया कि स्वार्थ सामने न टिक पाये ऐसे आंसू दिए कि जो घातक अश्त्र कहलाये ऐसा वज्र दिया कि पीड़ा खुद में ही सिमट जाए ऐसा रूप दिया कि पत्थर भी लिपट जाए ऐसा पैमाना दिया कि खूबी - कमियां तोलती जाए ऐसा सब्र दिया कि नाराज़ भी हो तो बोलती जाए ऐसा लिहाज़ दिया कि हर उम्र की सुनती जाए ऐसा नक़ाब दिया कि तन्हा भी खुबसूरत नज़र आये तूने सब कुछ दिया ईश्वर थोडा "फक्र" भी दे देता " मैं" इतना कुछ हूँ इसका थोडा "इल्म "तो दे देता
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें