कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 1964

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वो मुझे फूल, पत्तों , तितली,पहाड़ों में ढूंढता रहता है ।

वो मुझे फूल, पत्तों , तितली,पहाड़ों में ढूंढता रहता है । मैं भी उसे कल्पना में छिपा कर रखती हूँ... प्रकृति बची रहती है हमारे बीच
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें