कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 1956

भाषा / Language

तुम...... हमेशा से मेरे लिए

तुम...... हमेशा से मेरे लिए वो बारिश की बूंदें रहे हो जिससे गुज़रती हूँ तो ...... इंद्रधनुष हो जाती हूँ ये और बात है कि.... मेरा इंद्रधनुष..... सिर्फ इक लकीर है... जो सुर्ख लाल है .... सदियों से
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें