कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 1929

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कोई ऑप्शन बचता ही नहीं

कोई ऑप्शन बचता ही नहीं... तू मेरी हथेली पर छाले सा है। शुभरात💐💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें