कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 1891

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तुम ज़ुबाँ पर रखना

तुम ज़ुबाँ पर रखना हम नोंक पर रखेंगे रोज़ वाला इश्क़ ही तो है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें