कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 1890

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मेरा क्या है

मेरा क्या है ...? चिमटी से तार पर भी टांग कर रख देती हूँ ....उदासी कभी जूड़े में भी खोंस लेती हूँ। एक झोंका तू आ तो सही ....
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें