भाषा / Language
फिर एक रोज़ उसकी उदासी जम जम कर काई हो गयी। इतनी ठोस कि वो उ…
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फिर एक रोज़ उसकी उदासी जम जम कर काई हो गयी। इतनी ठोस कि वो उस पर पैर रख कर दूर चला गया।
उसके पैरों के निशान जब लोगों ने छू कर देखे तो उनमें कहानियां लबालब भरी हुई थी।
हर उदास कहानी सब की ज़िन्दगियों के ठीक बीचों बीच से गुजरती हुई। पुल ,नदी ,शहर ,खेत ,पहाड़ ,बालू पार कर ये लोग उस तक पहुंच ही गए .....
सिर्फ ये कहने कि ....हमें तुमसे प्यार है।
लिखो हमारे लिए कि..... उदासियाँ हमें पसंद हैं ।
रूमान के ठीक बाद वाला पायदान सिर्फ तुम बेहतरीन लिखते हो ....जादूगर
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें