कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 1873

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लाख कोशिश कर लो बांध भी तभी टूटेगा जब वेग की मर्जी होगी या…

लाख कोशिश कर लो बांध भी तभी टूटेगा जब वेग की मर्जी होगी या बांध की हूक प्रेम में इंतज़ार... बांधते गूंथते खोलते रहो।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें