कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 1868

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क्या कर सकते हो मेरे लिए

क्या कर सकते हो मेरे लिए ? अच्छा उस दिन जो .... बारिश हुई थी मुझपर ... उसकी कुछ बूंदें ...... अब तलक गीली हैं मुझमें .... बस ......रुकी भर हैं मुझमें ..... क्या उस पर ..... अपना नाम लिख सकते हो ? ठीक वैसे ही ...... जैसे मैंने .....अभी अभी तुम्हारा नाम .... इन फूलों पर लिखा है .... अपनी ख़ुश्बू से शुभ रात💐💐💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें