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रचना 1847

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तुमने मेरे रंग ढूंढ़े..... मैंने तुम्हारा संग चुना

तुमने मेरे रंग ढूंढ़े..... मैंने तुम्हारा संग चुना हम कितनी दफ़े एक ही इश्क़ में पड़े
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें