भाषा / Language
सफ़र... पहाड़ों को बस छू भर कर लौट गए ।किसी रोज़ उनपर भी आपकी…
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सफ़र...
पहाड़ों को बस छू भर कर लौट गए ।किसी रोज़ उनपर भी आपकी कलम फ़िदा हो जाये। हाथ उठा कर यही दुआएं मांग रही इस वक़्त।
तीसरा दिन आपकी किताब के साथ।
कितना सच कहा आपने...रेगिस्तान की प्यास बहुत बड़ी होती है। आपकी यही एक पंक्ति आपकी सबसे लंबी कहानी है। ये अनवरत रहे...
*कलम से ही लिखने का मन आज भी था।😊😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें