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रचना 1827

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तुम एक साथ सबके खुदा हो नहीं सकते

तुम एक साथ सबके खुदा हो नहीं सकते... मान मौसम का कहा ... छाई घटा जाम उठा Head phone पर यह ग़ज़ल ...और हाथों में प्रिय लेखक की किताब तर जाने के लिए और क्या चाहिए ? 😊😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें