कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 1817

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प्रेम इस लिए भी अनवरत रहा कि उसने सुख वाले कंधे को दुःख वाल…

प्रेम इस लिए भी अनवरत रहा कि उसने सुख वाले कंधे को दुःख वाले कंधे से कभी मिलने न दिया। बस प्रेमी मिलते रहे....
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें