कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 1815

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निर्वात भी कितना आभासी हो गया है

निर्वात भी कितना आभासी हो गया है .... कभी लोगों से ....कभी शब्दों से भर जाता है। 😊😊😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें