कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 1806

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सारे उत्तर खारिज़ हो गए

सारे उत्तर खारिज़ हो गए.... तब भी .. एक प्रश्न में अपार जीवन बचा रह गया ठीक उसी मिट्टी से एक क्षण में बन गयीं तुम। तुम पर प्रश्नसूचक यूँ ही नहीं गढ़ा ईश्वर ने शीश से शीर्ष तक नख से नयन तक यक्ष प्रश्न बनी रहो.... अनवरत तुम्हारे लिए सारी प्रार्थनाएं स्थगित हैं ईश्वर से लेकर पुरुष तक के उत्तरों में। मौन प्रश्न कौन प्रश्न
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें