कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 1801

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आँखों के अलावा सिर्फ कलम ने ही प्रेम को देखा ....चाहा.... ल…

आँखों के अलावा सिर्फ कलम ने ही प्रेम को देखा ....चाहा.... लिखा और जिया है। तस्वीर Vijayshree Tanveer की चुपके चुपके ली है ☺️☺️☺️
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें