भाषा / Language
स्त्री
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स्त्री ....
शीश के दो पाटों के बीच से निकलती हुई लाल
नैनों में पहुंचते ही पारदर्शी
फिर आँचल में सफ़ेद होकर
भुजाओं और उंगलियों में उतरकर गहरी नीली
अंत में....
बची हुई देह में
फिर रक्तवर्णा होती हुई गहरी नदी है।
स्त्री गंगा है क्या ?
या देह नामक स्थल
शायद कुम्भ है .......हर मायने का
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें