कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 1777

भाषा / Language

कितने ही चौदहवी के चाँद खारिज़ कर दिए

कितने ही चौदहवी के चाँद खारिज़ कर दिए .... मेरी चाहना सा कोई "बांवरा" मिला ही नहीं अब कुछ दिनों के लिए विदा... कुछ नई आदतें पालनी है।💐💐💐💐😄😄 #Fb detox
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें